भगवती भद्रकाली भलेई माता चम्बा का इतिहास


भगवती भद्रकाली भलेई माता चम्बा का इतिहास

22 August, 2020 Views - 1815

भगवती भद्रकाली भलेई माता के मंदिर का निर्माण राजा प्रताप सिंह वर्मन ने लगभग 1570 ई. में किया। निर्माण के बाद पुरुष तो मंदिर में दर्शन के लिए जाते थे, परन्तु स्त्रियों का यहाँ प्रवेश वर्जित था। इसका कारण भगवती का रौद्र रूप में प्रतिष्ठित होना या भद्रकाली से दक्षिणकाली में परिवर्तित होना हो सकता है। कारण चाहे जो भी हो, परन्तु प्राचीन काल में स्त्रियों के मन में भगवती के दर्शनों की अभिलाषा होती थी। परन्तु भगवती का आदेश समझ कर वह मंदिर में प्रविष्ट नहीं होती थीं।

मंदिर स्थापना के लगभग 280 साल बाद, चम्बा के राजा श्री सिंह की रानी के मन में भगवती के दर्शनों के तीव्र इच्छा हुई। वे अपनी दसियों सहित जब मंदिर में प्रवेश करने लगीं, तब पुजारी ने उन्हें मंदिर जाने से रोका, परन्तु, वे भी राजहठ के आगे टिक नहीं पाए।

(प्रिय पाठकों, इसके पीछे लिंगभेद नहीं था, बल्कि महामाया की इच्छा थी जो हम अल्पबुद्धि मनुषय समझ नहीं सकते, इसलिए इसमें कोई संदेह नहीं करना चाहिए)

इस प्रकार से श्री सिंह की रानी, इतिहास में भगवती माँ भले के दर्शन करने वाली पहली महिला बनीं।

माता भलेई ने दुर्गा कटोच को आदेश दिया की आज से कोई भी महिला भी मदिर में प्रविष्ट हो मेरे दर्शन कर सकती है, तब से अब भगवती महामाया के मंदिर में लाखों स्त्रियां दर्शन पा कर मनोवांछित इच्छा प्राप्त कर चुकी हैं।

अहंकार में मद, रानी जैसे ही एक सीढ़ी ऊपर चढ़ती, वैसे ही बकरे की बलि देतीं। जैसे ही उनकी नज़र भगवती की दिव्य मूर्ति पर पड़ी, उनकी आँखों की ज्योति चली गयी। तब रानी ने माता से क्षमा याचना की और अपनी भूल को स्वीकार किया और उन्होंने माता से दर्शन की कामना की। तब भगवती ने रानी की नेत्रज्योति लोटा दी।

इस घटना के लगभग 110 साल बाद, माता भलेई ने अपनी भक्त, दुर्गा कटोच को स्वप्ना में दर्शन दे कर मंदिर में आने की बात कही। तब दुर्गा कटोच अपनी सखियों सहित माता के मंदिर में पहुंची और पुजारी से परामर्श करके माता के मदिर में प्रवेश करके, भगवती माँ भलेई के दर्शन किये।


Temple   Culture   1815

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